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मिथुन राशि का वार्षिक राशिफल

मिथुन · May 21 – Jun 20 · Air · Ruled by Mercury

पौष १७, २०८२ · 2026-01-01 – 2026-12-31

मिथुन राशि नामाक्षर

का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह

यदि आपका नाम इन अक्षरों में से किसी एक से शुरू होता है, तो जन्म समय ठीक से ज्ञात न होने पर परंपरागत रूप से मिथुन राशि को ही आपकी जन्म राशि (चंद्र राशि) माना जाता है।

शुभ अंक5, 3, 2
शुभ रंगहरा

मिथुन राशि का वार्षिक राशिफल

मिथुन राशि संवाद से रास्ते खुलने पर फलती है। कल की नींद का असर आज मनःस्थिति में दिख सकता है, शायद काम के बोझ से भी अधिक। सुबह के सूर्य के साथ एक क्षण, जल का सादा अर्घ्य, एक शांत नमस्कार, पूरे दिन का स्वर कोमल कर देता है। सावधानी से बढ़ें; यह अवधि साहस से अधिक सतर्कता को फल देती है।

विस्तृत राशिफल

सामान्य भविष्यवाणी

बुध आज आपकी वाणी और सोच को तेज़ बनाते हैं। आज का दिन नया शुरू करने से अधिक शुरू हुए काम को पूरा करने के लिए उपयुक्त लगता है। किसी बात पर सहमत होने से पहले विवरण लिखा हुआ देख लेना ठीक रहेगा। एक लंबित बात निपटाकर यह अवधि पूरी करें।

स्वास्थ्य

कंधों की जकड़न प्रायः कंधों के अलावा कहीं और से शुरू होती है। कंधों या सिर में महसूस होने वाला तनाव वास्तव में मन की ही थकान हो सकती है जो शरीर में उतर आई है। आज भारी भोजन की अपेक्षा हल्का, गर्म और ताज़ा भोजन शरीर को अधिक भाएगा। अभी आपका स्वास्थ्य तीव्रता नहीं, निरंतरता को फल देता है। इस वर्ष बृहस्पति का आपकी राशि से प्रथम भाव में गोचर यहाँ अतिरिक्त सावधानी माँगता है।

करियर और व्यवसाय

कार्यस्थल की कठिन बातचीत ही पहले करने योग्य होती है। कोई पुराना वादा या अधूरा काम आज फिर सामने आ सकता है; उसे पूरा करने से सोच से अधिक हल्कापन महसूस होगा। अगली भूमिका के लिए ज़रूरी कौशल सीखने में आज थोड़ा समय देंगे तो वह आगे कई गुना फल देगा। आपका पक्ष शब्द नहीं, कार्य का इतिहास कहे। इस वर्ष शनि का आपकी राशि से दशम भाव में गोचर यहाँ अतिरिक्त सावधानी माँगता है।

प्रेम और रिश्ते

दोनों पक्ष न कुरेदें तो पुरानी गलतफहमी की पकड़ स्वयं ढीली होती है। आज छोटी-छोटी बातें ही, एक संदेश, एक कप चाय, एक पल ध्यान से सुन लेना, सबसे अधिक स्नेह कह जाएँगी। कोई अपना आज थोड़ा अकेला समय चाहे तो स्नेह घटाए बिना जगह दें, यह याद रखा जाएगा। जो पहले सुनता है, प्रायः वही झगड़ा समाप्त करता है।

धन और वित्त

जो प्रस्ताव आज ही उत्तर मांगे, उसका उत्तर कल देना ठीक रहता है। अभी कोई उधार माँगे तो याद रखें कि पैसा और रिश्ता दोनों साथ-साथ सफ़र पर निकलते हैं। खर्च शुरू होने से पहले ही छोटा सा निश्चित हिस्सा अलग रखने की आदत ही समय के साथ चुपचाप धन जोड़ती है। धीरे-धीरे बनाई संपत्ति ही टिकती है।

शिक्षा

जो प्रश्न पूछने में संकोच है, वही आपको रोके हुए है। परिणाम, प्रवेश या आवेदन से जुड़ी खबर जल्द आ सकती है; जो भी हो, वह कम से कम प्रतीक्षा की बेचैनी समाप्त कर देगी। पढ़ते समय मोबाइल दूसरे कमरे में रखना पहले दस मिनट कठिन लगेगा, पर घंटे भर बाद उसका आनंद समझ आएगा। ध्यानभंग के चार घंटों से एकाग्र एक घंटा भारी है।

यात्रा

दूसरों के लिए की गई यात्रा स्वयं के लिए की गई से अधिक लौटाती है। जो भेंट आप टालते आ रहे थे, रिश्तेदार, मित्र या जाना-पहचाना स्थान, अब उसका समय आ गया लगता है। पानी की बोतल और नियमित दवाएँ हाथ में रखने से हर यात्रा सहज बनती है, यह छोटा प्रयास करने योग्य है। पहले पहुँचने से अधिक सुरक्षित पहुँचें।

परिवार और घर

रिश्तेदारों के बीच दूरी बहस से नहीं, भोजन से घटती है। भाई-बहन या रिश्तेदार के फोन या संदेश में सचमुच काम की खबर आ सकती है। जिन बड़ों से बहुत दिनों से बात नहीं हुई वे आपको याद कर रहे हो सकते हैं; आज का छोटा फोन उन्हें बड़ी खुशी देगा। अभी परिवार को दिया समय कभी व्यर्थ नहीं जाता।

आध्यात्मिक विकास

संशय मार्ग का ही अंग है, मार्ग छोड़ने का संकेत नहीं। आज छोटी सी सेवा, बिना कहे चुपचाप की गई सहायता, लंबे कर्मकांड से अधिक मन उजला कर सकती है। एक दिन थोड़ा हल्का रखें, सादा भोजन, कोमल वाणी, इससे शरीर ही नहीं, शरीर से गहरी किसी चीज़ को भी विश्राम मिलता है। कठिनाई भी शिक्षा है; विरोध से पहले उसे समझें।

वार्षिक उपाय

बृहस्पति

दिन: गुरुवार

गुरुवार को "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" का जाप करें और पीली वस्तु, चना, हल्दी अथवा पीला वस्त्र दान करें। गुरुवार का व्रत, एकादशी, गुरु नारायण तथा अपने गुरुजनों और बड़ों की पूजा, और गुरुवार मंदिर में चना अर्पित करना बृहस्पति को बलवान बनाता है। माथे पर अष्टगंध तिलक दैनिक परंपरागत सहयोग है। गुरुजनों की सेवा ही प्राचीन और श्रेष्ठ उपाय है।

मंत्र: ॐ बृं बृहस्पतये नमः

शनि

दिन: शनिवार

शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर "ॐ शं शनैश्चराय नमः" का जाप करें। शनि महाराज को सीधे सरसों का तेल अर्पित करना, तथा कौवे, कुत्ते और भैरव के स्थान पर भोजन देना शनिवार का परंपरागत अर्पण है। शनि अर्पण से नहीं, धैर्य, ईमानदार परिश्रम और वृद्ध एवं निर्धनों की सेवा से शांत होते हैं।

मंत्र: ॐ शं शनैश्चराय नमः

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